गया:हावड़ा–जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में हुए करोड़ों रुपये के सोना लूटकांड में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया है। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर गया रेल न्यायालय ने इस मामले में चार पुलिस सिपाहियों सहित कुल छह आरोपियों के विरुद्ध वारंट जारी किया है। रेल एसपी इनामुल हक ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
वारंट जारी होने के बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और उनके नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई सोना लूटकांड में अब तक की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है।
जांच एजेंसी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लूटे गए सोने की बरामदगी है। जांच में सामने आया है कि लूटा गया सोना अलग-अलग स्थानों पर छिपाया गया है और उसे ठिकाने लगाने की सुनियोजित कोशिश की गई थी। इस पूरे प्रकरण ने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिन पर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस संगठित अपराध में शामिल पाए गए।
यह सनसनीखेज वारदात 21 नवंबर 2025 को हुई थी। कानपुर के स्वर्ण कारोबारी मनोज सोनी का कर्मचारी धनंजय शाश्वत लगभग एक किलो सोना लेकर हावड़ा–जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22307) से यात्रा कर रहा था। कोडरमा और गया के बीच चलती ट्रेन में पुलिस वर्दी में आए लोगों ने उसे रोका, मारपीट की और सोना लूटकर फरार हो गए। लूटे गए सोने की कीमत करीब 1.44 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
जांच के दौरान बड़ा खुलासा तब हुआ, जब इस कांड का मास्टरमाइंड गया जीआरपी थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को बताया गया। पुलिस के अनुसार, उन्हीं के निर्देश पर पूरी साजिश रची गई थी और जवानों को इसमें शामिल किया गया। शुरुआत में इस मामले की प्राथमिकी कोलकाता में दर्ज की गई थी, जिसे बाद में बिहार रेल पुलिस को स्थानांतरित किया गया। गहन जांच के बाद राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां से उनकी जमानत याचिका भी रेल न्यायालय ने खारिज कर दी।
इस मामले में गया जीआरपी थाने के चार सिपाही—करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, संजय कुमार और आनंद मोहन—भी आरोपी पाए गए हैं। इनके अलावा परवेज आलम और रेल थाने के पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा को भी इस साजिश में शामिल किया गया है। निलंबन की कार्रवाई के बाद से सभी आरोपी फरार चल रहे थे, जिसके चलते जांच प्रभावित हो रही थी।
रेल एसपी इनामुल हक ने बताया कि यदि आरोपियों ने जल्द ही आत्मसमर्पण नहीं किया या गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की, तो अगली कार्रवाई के तहत उनके खिलाफ इश्तहार जारी किया जाएगा। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। एसआईटी को निर्देश दिया गया है कि मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए।
हाई-प्रोफाइल सोना लूटकांड ने न केवल रेल पुलिस बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल एसआईटी हर पहलू की गहन जांच कर रही है और जल्द ही फरार आरोपियों को पकड़ने का दावा किया जा रहा है।